Friday, October 10, 2014

मालगुडी डेज के नारायण

ज आर. के. नारायण का 108वां जन्‍म-दिवस है। दक्षिण भारतीय अंग्रेजी लेखक और उत्‍तर भारतीयों में मालगुडी डेज के लेखक के रूप में प्रसिद्ध नारायण अपने समय के बड़े उत्‍प्रेरक लेखक रहे। जिन्‍हें उनके अंग्रेजी उपन्‍यास वेंडर ऑफ स्‍वीट्स पढ़ने का अवसर मिला, वे नारायण की साहित्यिक उत्‍कृष्‍टता से भलीभांति परिचित हैं। उनके लेखन में पचास-साठ के दशक का दक्षिण भारतीय जीवन अपने मूलरूप में प्रकट होता है। उनकी रचनाएं अपने किसी भाग, अंश या खण्‍ड में यह अहसास ही नहीं होने देती कि इन्‍हें कोरी कल्‍पनाओं के आधार पर रचा गया है। आर. के. नारायण की मर्मस्‍पर्शी रचनाओं पर आधारित शंकर नाग के निर्देशन में बनाया गया मालगुडी डेज धारावाहिक जितनी बार भी देखा जाए उतनी बार जीवन के सम्‍बन्‍ध में एक नई संवेदना और सीख ही देता है। विशेषकर बच्‍चों के अपरिपक्‍व मन-मस्तिष्‍क पर मालगुडी डेज धारावाहिक का चलचित्रण सकारात्‍मक असर डालता है और जीवन के मूल को समझने और उसके अनुसार आचरण करने की प्रेरणा देता है।
वेंडर ऑफ स्‍वीट्स उपन्‍यास का हिन्‍दी रूपान्‍तरण मिठाईवाला भी निरुपम है। मिठाईवाला की भूमिका में अनंतनाग ने अत्‍यन्‍त प्रभावी अभिनय किया है। उपन्‍यास की कहानी, कथ्‍य और उद्देश्‍य को धारावाहिक में इतने मर्म से प्रस्‍तुत किया गया है कि दर्शक के अनन्‍य प्रबोध चक्षु स्‍वत: खुलने लगते हैं। इसमें उसे आर. के. नारायण, मालगुडी डेज, मिठाईवाला, शंकर नाग, अनंत नाग सहित धारावाहिक के सभी चरित्र चित्रण गुजरे कालखण्‍ड में अपने जीवन से जुड़े हुए लगते हैं। मालगुडी डेज के माध्‍यम से उत्‍तर भारतीयों के सामने आर. के. नारायण के लेखकीय कौशल को प्रस्‍तुत करने के लिए शंकर नाग निश्चित रूप से प्रंशसनीय हैं। लेकिन शंकर नाग ने भी तो आर. के. नारायण के उपन्‍यास से प्रभावित होकर ही धारावाहिक बनाने की प्रेरणा ली। इसलिए मालगुडी डेज के सम्‍पूर्ण वाड.मय का जो भी साहित्यिक या कलात्‍मक आकर्षण है उसके सबसे बड़े निर्माता तो आर. के. नारायण ही हैं।
हिन्‍दी में मनोहर श्‍याम जोशी ने मालगुडी डेज की पटकथाएं लिखीं। उन्‍होंने धारावाहिक के संवाद भी रचे। हिन्‍दी के अनेक जाने-माने कलाकारों, निर्देशकों और साहित्‍य-सेवकों ने भी मालगुडी डेज नामक अंग्रेजी साहित्‍य-श्रृंखला को हिन्‍दी में अनूदित और चलचित्रित कर बहुत बड़ा काम किया है। मालगुडी डेज के हिन्‍दी संस्‍करण से ही हिन्‍दीभाषी आर. के. नारायण की सत्‍साहित्यिक उत्‍कृष्‍टता को जान पाए। कला और साहित्‍य प्रेमियों का उनके प्रति जो भी समादर है, उसके आधारभूत तत्‍वों में खुद आर. के. नारायण तो हैं ही साथ ही मालगुडी डेज को हिन्‍दी में प्रस्‍तुत करनेवाला कलाकार-दल भी इसके लिए बधाई व आदर का पात्र है।  
आर. के. नारायण साहब की साहित्यिक स्‍मृतियां इसलिए भी उज्‍ज्‍वल बनी हुई हैं क्‍योंकि दक्षिण भारत की राजनीति-शासन ने साहित्‍य को सम्‍मान देने का अपना अध्‍यवसाय कभी रुकने नहीं दिया। वहां के प्रशासनिक तन्‍त्र ने साहित्‍य के लिए अलग से विशेष योजनाएं चलाईं, जो आज तक यथावत हैं। इस साहित्‍यकार ने मद्रास के उपनगरीय क्षेत्र मालगुडी, कुम्‍भम को भी अपने साहित्‍य के द्वारा विश्‍व-पटल तक पहुंचाया। विश्‍व को इन क्षेत्रों की सांस्‍कृतिक, सामाजिक, आर्थिक पहचान से अवगत कराया। उनके इस योगदान को मालगुडी और कुम्‍भम का संवेदनशील व्‍यक्ति कभी नहीं भुला सकता।
यही कार्य साहित्‍य को देखते हुए पूरे देश में होने चाहिए ताकि आर. के. नारायण जैसे लेखकों की रचनाओं से जनमानस जीवन-प्रसाद ग्रहण करता रहे।
                                              --विकेश कुमार बडोला

12 comments:

  1. अच्छा किया आपने उनकी याद दिलाकर. स्मृतियाँ ताज़ा हो गयी.

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  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति.
    इस पोस्ट की चर्चा, रविवार, दिनांक :- 12/10/2014 को "अनुवादित मन” चर्चा मंच:1764 पर.

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  3. आर. के. नारायण जी के १०८ वें जन्‍म-दिवस पर उनकी याद में बहुत बढ़िया ज्ञानवर्धक जानकारी प्रस्तुति हेतु आभार!

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  4. Bahut sunder prastuti ...badhayi aapko !!

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  5. चलिए देश में किसी प्रदेश में तो ऐसा कार्य है जो साहित्य को जीवित रक्खे हुए है ...
    वैसे के आर नारायण जी को और उनके लिए हलके फुल्के जीवन से भरपूर साहित्य भुलाना आसान तो नहीं है ... अनेक यादों को ताज़ा कर दिया आपने ...

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  6. सुन्दर स्मृतियाँ … नमन

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  7. सुन्दर सार्थक प्रस्तुति
    आपको दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनायें!

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  8. आर के नारायण और मालगुडी डेज से कितनी यादें जुड़ी हुई हैं..बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  9. मालगुडी डेज जैसे रचा बसा है हमारे मन में
    टीवी पर देखा करता था बहुत अच्छा लगता था
    साहित्य को जो योगदान आदरणीय आर. के. नारायण साहब ने दिया है वो कभी भुलाया नहीं जा सकता

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  10. जब ये टीवी सीरियल दुरदर्शन पर आता था तब इसका एक भी एपीसोड कभी मिस नहीं करते थे
    सच मैं आर.के. नारायण की ये अनुपम कहानिया शायद ही कोई भूल सकता है.............

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  11. आपका आलेख पढ़ा।बहुत सी जानकारियों से भरा आपका आलेख महत्वपूर्ण है।

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  12. Aapka lekh bahut hi acha hai. Malgudi days ki yad aa gai. Ab maine net pe se is kitab ko download kiya padhne ke liye. Thank you so much.

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