Friday, April 18, 2014

वरिष्ठ साहित्यकार श्री बल्‍लभ डोभाल का नागरिक अभिनन्दन और उनकी पुस्त‍क दस प्रतिनिधि कहानियां का विमोचन


रिष्‍ठ साहित्‍यकार श्री बल्‍लभ डोभाल विगत 30 मार्च को 84 वर्ष के हो गए। इस शुभावसर से प्रेरणा पाकर सूर्या संस्‍थान, वेदान्‍त मण्‍डलम, नौएडा नागरिक महासंघ हितकर हिमालय, डा. डी. पी. सक्‍सेना मेमोरियल ट्रस्‍ट नोएडा, वृहद् दिल्‍ली साहित्‍यकार मंच एवं अदबी संगठन (फरीदाबाद) जैसी साहित्यिक-सामाजिक-सांस्‍कृतिक अखिल भारतीय संस्‍थाओं ने सोमवार 31 मार्च 2014 को हिन्‍दी भवन, दीनदयाल उपाध्‍याय मार्ग, माता सुन्‍दरी मार्ग, दिल्‍ली में डोभाल जी का सादर अभिनन्‍दन किया। इस विशेष अवसर पर किताबघर प्रकाशन द्वारा प्रकाशित डोभाल जी के कहानी संग्रह दस प्रतिनिधि कहानियां का लोकार्पण किया गया। पुस्‍तक का लोकार्पण सुविज्ञ पाठक श्री प्रदीप चौधरी द्वारा किया गया। पुस्‍तक विमोचन के इतिहास में संभवत: यह पहली बार होगा कि किसी प्रतिष्ठित साहित्‍यकार की पुस्‍तक का विमोचन किसी सुधी पाठक द्वारा किया गया। यह लेखक की अतिसंवेदनशीलता का परिचायक है। इससे निश्चित रूप से समाज में, खासकर साहित्‍य समाज में एक नई विचारधारा का विकास होगा। और इसका सम्‍पूर्ण श्रेय श्री बल्‍लभ डोभाल तथा अंतस को भेदनेवाले उनके साहित्‍य सृजन को जाता है। श्री प्रदीप चौधरी ने डोभाल जी और उनकी साहित्यिक रचनाओं से अपने लगाव के बारे में अत्‍यन्‍त भावुक वक्‍तव्‍य दिया।
बाएं से डा. गंगा प्रसाद विमल, डा. मनोहर लाल शर्मा, डा. बलदेव वंशी, श्री बल्‍लभ डोभाल, श्री से.रा. यात्री, श्री देवेन्‍द्र मित्‍तल 
डोभाल जी के नागरिक अभिनन्‍दन कार्यक्रम में डा. मनोहर लाल शर्मा, डा. बलदेव वंशी, श्री से. रा. यात्री, डा. गंगा प्रसाद विमल, किताबघर प्रकाशन के श्री सत्‍यव्रत, हिन्‍दी अकादमी दिल्‍ली के सचिव श्री हरिसुमन बिष्‍ट, श्री पंकज बिष्‍ट आदि महाशय उपस्थित थे। डोभाल जी के नागरिक अभिनन्‍दन और उनकी पुस्‍तक विमोचन के कार्यक्रम में अनेक विद्वानों और लेखकों का जमघट लगा। इस शुभ घड़ी में कई वक्‍ताओं ने डोभाल जी की सृजन गाथा पर मननयोग्‍य प्रकाश डाला। प्रमुख वक्‍ताओं में डा. गंगा प्रसाद विमल, श्री से. रा. यात्री, डा. बलदेव वंशी तथा डा. मनोहर लाल शर्मा सम्मिलित थे।
प्रतिष्ठित समालोचक डा. मनोहर लाल शर्मा ने बल्‍लभ जी के सृजन को अत्‍यन्‍त प्रेरणादायी और समाजोपयोगी बताया। उन्‍होंने डोभाल जी को व्‍यक्तिगत लाभ के लिए किसी के आगे नहीं झुकनेवाले एक ऐसे साहित्‍यकार के रूप में रेखांकित किया, जिसने साहित्यिक यात्रा में स्‍वार्थ के पड़ावों से कभी कोई समझौता नहीं किया। जीवन में कई बार घोर उपेक्षा, अनदेखी की घटनाओं को जिसने अपने साहित्‍य को सींचने के लिए परिवर्तित किया हो और अपने लेखन में इससे उत्‍प्रेरणा ग्रहण की हो, वह व्‍यक्ति केवल अपनी साहित्‍य सृजनात्‍मकता के लिए ही नहीं अपितु अपने व्‍यक्तित्‍व के लिए भी सदैव अभिनन्‍दनीय, पूजनीय रहेगा।

अभिनन्‍दन संगोष्‍ठी का मंच संचालन सूर्या संस्‍थान नोएडा के मुख्‍य कार्यपालक श्री देवेन्‍द्र मित्‍तल और वेदान्‍त मण्‍डलम् के श्री विजय विजन ने किया। कार्यक्रम संयोजक प्रभा-सूरज थपलियाल, डा. ऊषा-कैलाश डोभाल और प्रकाश-सुनील डोभाल ने कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी साहित्‍यकारों, लेखकों एवं साहित्‍य प्रेमी सुधी पाठकों को धन्‍यवाद ज्ञापित किया।

8 comments:

  1. बहुत ही प्रभावी चित्र प्रस्तुत किया है डोभाल जी का आपने...

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  2. डोभाल जी के पुस्तक के बारे में बताने के लिए धन्यवाद. पढ़ने की कोशिश करूँगा.

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  3. वरिष्‍ठ साहित्‍यकार श्री बल्‍लभ डोभाल जी को ८४ वर्ष पूरे करने पर बधाईयाँ और उनकी पुस्तक हेतु शुभकामनाएँ.निस्वार्थ साहित्य की सेवा करने वाले बहुत ही कम ऐसे साहित्यकार आज मिलते हैं निस्संदेह वे सदैव अभिनन्‍दनीय और पूजनीय रहेंगे.

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  4. वरिष्‍ठ साहित्‍यकार श्री बल्‍लभ डोभाल जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें...बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  5. डोभाल जी के साहित्यिक योगदान को परिलक्षित करती सुन्दर प्रस्तुति ... उनकी लंबी आयुं कि प्रार्थना के साथ बहुत बहुत बधाई और शुभ कामनाएं ...

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  6. वरिष्‍ठ साहित्‍यकार श्री बल्‍लभ डोभाल जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें..

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  7. डोभाल जी को हमारा भी हार्दिक अभिनन्दन..

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  8. चलिए आज आपकी इस पोस्ट के बहाने हमें भी वरिष्‍ठ साहित्‍यकार श्री बल्‍लभ डोभाल जी के बारे में बहुत कुछ जानने और समझने को मिला हमारी और से भी श्री बल्‍लभ डोभाल जी को हमारा भी हार्दिक अभिनन्दन ...

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