Tuesday, April 11, 2017

पत्थर फेंकनेवालों से निपटने का तरीका केवल कठोर हो

पिछले वर्ष सितंबर में ही राजग की केंद्र सरकार ने एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्‍मीर भेजा था, जिसकी अध्‍यक्षता गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने की थी। हालांकि यह नौबत भी तब आई जब स्‍थानीय अतिवादियों पर पैलेट गन के इस्‍तेमाल को लेकर विपक्ष ने सुरक्षा बलों को मानवाधिकारों के उल्‍लंघन करनेवाला बताया। परंतु केंद्र सरकार ने विपक्ष से आग्रह किया कि वह स्‍वयं कश्‍मीर में पत्‍थर फेंकनेवालों की वास्‍तविक स्थिति का अनुमान ले ले ताकि सुरक्षा बलों द्वारा आत्‍मरक्षा में चलाई जानेवाली पैलेट गन की सच्‍चाई सामने आ सके। लेकिन कश्‍मीर में सुरक्षाकर्मियों पर स्‍थानीय युवकों द्वारा आतंकवादियों के उकसावे पर पत्‍थर फेंकने के आलोक में चुभता हुआ प्रश्‍न यह उभर रहा है कि आखिर इतने बड़े राष्ट्र को अपने सैन्‍य बलों की तुलना में भाड़े के अतिवादियों के बारे में इतना सोचने-विचारने की क्‍या आवश्‍यकता है। कश्‍मीर समस्‍या का सच अब किसी भी रूप में गुप्‍त नहीं रहा। केंद्र सहित स्‍थानीय विपक्ष, मुसलिम राजनीतिक दल और पाक-प्रशासित आतंकी समूह सभी भलीभांति अवगत हैं कि कश्‍मीर में पत्‍थर फेंकने का कार्यक्रम कोई रीतिगत कार्यक्रम नहीं है। इस काम के लिए किसी भारतीय हित अथवा राष्‍ट्रीय उत्‍पादन की दिशा निर्धारित नहीं होती। आधिकारिक रूप से भारत के हिस्‍से कश्‍मीर में भारतीय रक्षा बलों पर पत्‍थर फेंकना हर कोण से अवैध है। तब भी इस समस्‍या को देखने का दृष्टिकोण भारत में ही दो तरह का है। एक वे राजनेता, बुद्धिजीवी, पत्रकार तथा इनके समर्थक लोग हैं जो किसी भी प्रत्‍यक्ष भारत विरोधी गतिविधि में शामिल मुसलिमों को कभी भी दोषी या आरोपी नहीं समझते। यह वर्ग उलटा ऐसे राष्‍ट्र विराधियों की हरकतों को हास्‍यास्‍पद तथ्‍यों व तर्कों के आधार पर सही ठहराने को जुटा रहता है। दुर्भाग्‍य से इसमें भारतीय न्‍यायिक व्‍यवस्‍था के व्‍यवस्‍थापक तथा न्‍यायाधीश भी शामिल हैं।
सितंबर16 में कश्‍मीर का दौरा करने से पूर्व केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल वहां जाने के लिए इसीलिए तैयार हुआ था क्‍योंकि केंद्र सरकार के सम्‍मुख न्‍यायालय का आदेश मानने की राजनीतिक विवशता थी। उल्‍लेखनीय है कि कश्‍मीर और पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में सशस्‍त्र बल विशेष सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत अतिरिक्‍त सेना तैनात है। विगत वर्षों में सीमावर्ती इन राज्‍यों से भारत में निरंतर घुसपैठ होती थी। घुसपैठियों का उद्देश्‍य भारत में घुस कर इसकी संप्रभुता को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाना होता था। नकली मुद्रा, नकली सामान, प्रतिबंधित मद्य व मदिरा पदार्थों की तस्‍करी से लेकर मानव तस्‍करी तथा आतंकवाद के प्रसार के लिए आवश्‍यक विस्‍फोटक आदि का आवागमन इन्‍हीं राज्‍यों की सीमाओं से होता रहा है।
पाकिस्‍तान, बांग्‍लादेश, म्‍यांमार जैसे देशों से भारत में होनेवाली घुसपैठ का मकसद अनेक प्रकार के अवैध कारोबारों से केवल पैसा कमाना ही नहीं था बल्कि इन मुसलिम देशों के कट्टर मुसलिम आतंकी समूहों ने भारत में इसलाम के प्रसार के लिए भी हर वह काम किया जो भ्रष्‍ट भारतीय सरकारी तंत्र की मिलीभगत से हो सकता था। आज इसी का परिणाम है कि भारत में मुसलिमों की जनसंख्‍या तेजी से बढ़ती जा रही है। वर्तमान की केंद्र सरकार भी पिछली सरकारों की तरह इस विषय में मुंह सिल कर बैठी हुई है। सरकार को गलत अंदाजा है कि वह विकास की बातों व कार्यों के दम पर इसलामी आतंकी समूहों की भारत को इसलामिक देश बनाने की गुप्‍त कारगुजारियों को खत्‍म कर देगी।
सरकार को ध्‍यान रखना चाहिए कि दुनिया में सदियों से जितने भी युद्ध लड़े गए हैं, उनके मूल में अपने-अपने मतों व सिद्धांतों की स्‍थापना ही होती है। इस समय भी विश्‍वभर में व्‍याप्‍त आतंक का गुप्‍त लक्ष्‍य इसलाम का अधिरोपण करना ही है। यदि ऐसा न होता तो आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, स्‍वीडन, बेल्जियम जैसे विकसित देशों में आतंकी घटनाएं देखने को न मिलतीं। कश्‍मीर में पत्‍थरबाजी भी बहुत प्राय: भारत में इसलाम को थोपने का ही एक हथकंडा है। इसे हलके में आंकना सरकार को दो तरह से भारी पड़ेगा। एक, आनेवाले समय में वह सत्‍तासीन नहीं हो सकेगी। दूसरे, पत्‍थरबाजों से समझौते की बात पर आखिर में वह मुंह की ही खाएगी और राष्‍ट्र की राष्‍ट्रीयता खतरे में पड़ेगी। यहां इस लेखक को बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि विश्‍व के धर्मनिरपेक्ष विद्वानों को आतंक का यह रूप विचलित नहीं करता। क्‍योंकि विगत दिनों ब्रिटेन,रूस और स्‍वीडन में हुई आतंकी घटनाओं की प्रतिक्रिया में ऐसे विद्वानों ने अपना पत्रकारीय रोष प्रकट नहीं किया।
भारत में कश्‍मीर वह क्षेत्र है, जो विगत साढ़ तीन दशकों से प्रतिक्षण आतंकी कारनामों के लिए कुख्‍यात रहा है। पाकिस्‍तान में स्‍थापित आतंकी समूह कोई न कोई बहाना बनाकर कश्‍मीर में भारतीय लोकतंत्र के लिए चुनौती बने हुए हैं। यदि किसी गुप्‍त सैन्‍य अभियान कार्रवाई के तहत किसी आतंकी समूह के आतंकियों को पकड़ने के लिए सेना आगे बढ़ती है तो स्‍थानीय मुसलिम युवक और जनता आतंकियों का सुरक्षा कवच बनकर सामने आ खड़ी होती है। सेनाकर्मी यदि थोड़ी बहुत सख्‍ती करते हैं तो मुसलिम युवक उन पर पत्‍थरों की बौछार करने लगते हैं। पिछले साल तक सेना को अनुमति थी कि वह ऐसे उपद्रवियों पर पैलेट गन चला सकती है। लेकिन विपक्ष और स्‍थानीय मुसलिम नेताओं ने पैलेट गन के इस्‍तेमाल पर रोक के लिए राज्‍य उच्‍च न्‍यायालय तथा सर्वोच्‍च न्‍यायालय में अपील कर दी। धर्मनिरपेक्ष तथा तटस्‍थ बनने का नाटक कर नेताओं, विद्वानों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और इनके समर्थकों की आवाज पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने भी केंद्र सरकार को पैलेट गन के स्‍थान पर कोई दूसरा विकल्‍प अपनाने का निर्देश दिया। लेकिन इस संपूर्ण कश्‍मीर चिंतन के दौरान न्‍यायाधीशों ने यह नहीं सोचा कि सैनिकों को पत्‍थर फेंकनेवालों के हमलों का प्रतिरोध न करने पर कितनी जान-माल की हानि उठानी पड़ रही है। क्‍योंकि पत्‍थरबाज तो बिना किसी कारण सैन्‍यकर्मियों को देखते ही उन पर हमला करने लगते हैं। अब त‍क पत्‍थरबाजों के हमलों में अनेक सैनिक शहीद हो चुके हैं तथा कई बुरी तरह घायल पड़े हैं।
यह देख कर बहुत दुख होता है कि स्‍थानीय अतिवादियों को इतना अतिवाद फैलाने तथा भारतीय गणतांत्रिक संप्रभुता को खुलेआम धता बताने के बाद भी सुधरने और मुख्‍यधारा में लौट आने के अनेक अवसर दिए जा रहे हैं। परंतु सैन्‍यकर्मियों तथा भारतीय जन-गण-मन की अस्मिता की रक्षा करने को आतुर आम भारतीयों को मुख्‍यधारा में भी भेदभाव झेलना पड़ रहा है। देश में अनेक युवक ऐसे हैं जो भारत भूमि के लिए अपना सर्वस्‍व झोंकने को सदैव तत्‍पर हैं, पर उनकी खोज-खबर के लिए न तो कांग्रेसियों के पास ही समय था और न ही भाजपा की केंद्र सरकार ही उनके बारे में कुछ कर पा रही है। पत्‍थरबाजों को मुख्‍यधारा में लाने की अपील प्रधानमंत्री व्‍यर्थ ही कर रहे हैं क्‍योंकि ये ऐसे अतिवादी तत्‍व हैं जो धार्मिक कट्टरता के आत्‍मदंश से पीड़ित हैं। इनसे छुटकारा पाने के लिए इन्‍हें आतंकवादियों की तरह ही निपटाना पड़ेगा। अन्‍यथा देश का महत्‍वपूर्ण समय तथा धन-संसाधन यूं ही ऐसे गुंडातत्‍वों पर व्‍यर्थ होता रहेगा।
विकेश कुमार बडोला

6 comments:

  1. दिनांक 13/04/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंदhttps://www.halchalwith5links.blogspot.com पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
    आप की प्रतीक्षा रहेगी...

    ReplyDelete
  2. इस तरह की अराजकता फैलाने वालों के लिए कोई ठोस कानून होना चाहिए.....
    उम्दा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "नयी बहु - ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  4. बिल्कुल सही कहा आपने...पत्थर फेंकनेवालों से निपटने का तरीका केवल कठोर ही होना चाहिए। हमारे मानवतावादी दृष्टिकोन से ही ये लोग अपनी मनमानी कर रहे है। सुंदर प्रस्तुति।

    ReplyDelete
  5. पत्थर फेंकने वालों पर लगाम लगाने के लिए सरकार कोई जल्द से जल्द कोई क़दम उठाना चाहिए। कहीं ऐसा ना हो की पत्थर वाजों की आड़ में आज कुछ आतंकी हैं, कल पूरी सेना खड़ी हो जाए।

    ReplyDelete
  6. shi or uchit tarika bataya aap ne keep posting and keep visiting on www.kahanikikitab.com

    ReplyDelete