Saturday, March 1, 2014

सौ% मतदान के लिए

लोकतन्‍त्र शब्‍द सही मायनों में सिद्ध हो, इसकी व्‍यावहारिकता एक-एक नागरिक के व्‍यक्तित्‍व में सुख-शान्ति-समृद्धि के रूप में दिखाई दे, ऐसी शुभकामना है। अगर शुभकामना से ही काम चल जाता तो कितना अच्‍छा होता। लेकिन हम जानते हैं कि लोकतन्‍त्र को मजबूत करने का कर्त्‍तव्‍य सभी का है। इसके लिए सभी को अपने-अपने स्‍तर पर प्रयास करने चाहिए। भारतीय निर्वाचन आयोग हरेक नागरिक से अपना मत प्रयोग करने का अनुरोध करता है। अनुरोध कार्यान्वित हो इसके लिए उसे चुनाव से कम से कम एक साल पहले तक सभी चुनावी केन्‍द्रों में ठोस चुनाव-व्‍यवस्‍था बनानी होगी।
इस प्रकार एकत्रित जनसमूह मतदान भी कर सके तो बात बने
सामान्‍यत: लम्‍बी कतार में लग कर मतदान करने में एक व्‍यक्ति को एक डेढ़ घण्‍टे तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ज्‍यादातर लोग तो देर तक पंक्ति में लगने और प्रतीक्षा करने की कठिनाई के कारण मतदान करते ही नहीं हैं। अमीर लोग भी लोकतन्‍त्र के इस मेले में शामिल होना अपनी निन्‍दा समझते हैं। यदि एक दो करोड़ इस तरह के लोग कतार में लगने के कारण मतदान नहीं करते हैं तो इससे भी चुनावी परिणाम प्रभावित होते हैं। एक या दो करोड़ मत बहुत होते हैं। मतदान-असुविधा के कारण ज्‍यादातर मतदाता मतदान से वंचित रहते हैं। ऐसे में संभावी लोकतान्त्रिक व्‍यवस्‍था में वे अपने लोकतान्त्रिक अधिकार को किस प्रकार महसूस करेंगे? इस उदासीनता को दूर किया जाना चाहिए। ऐसे सम्‍पूर्ण वोटिंग का उद्देश्‍य कभी पूरा नहीं हो सकता। निर्वाचन आयोग को लोकतन्‍त्र को महत्‍वपूर्ण बनाने के क्रम में अपने चुनाव सुधार कार्यक्रम में बहुत से नए प्रयोगों को जोड़ना होगा।
 यह भी देखने में आता है कि नाम, पते, आदि की गलतियों के कारण मतदातागण मतदाता पहचान-पत्र होते हुए भी मतदान नहीं कर पाते हैं। या मतदाता-सूची में कई मतदाताओं के नाम चढ़े ही नहीं होते या व्‍यक्ति विशेष को अपने मतदाता-पत्र में मुद्रित व्‍यक्ति-विवरण मतदाता सूची में नहीं मिलते। इस कारण वह मतदान से वंचित ही रहता है। जब चुनाव प्रचार-प्रसार की साल छह माह पहले से ही तैयारी हो सकती है तो मतदान के लिए एक ही दिन क्‍यों निश्चित है! अगर समयाभाव से सभी मतदाता अपने मत का प्रयोग नहीं कर पाते तो निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और उपयोगिता पर संदेह होना स्‍वाभाविक है। उसे अपनी चुनावी तैयारियों पर पुनर्दृष्टि डालने की सख्‍त जरूरत है। 
इक्‍कीसवीं सदी में जबकि प्रौद्योगिकी कई स्‍तरों पर कई महत्‍वपूर्ण दैनिक कार्य निपटाने में मनुष्‍य की सहायता कर रही है। और इससे समय की बचत और कार्य-निष्‍पादन समुचित व पारदर्शी बन रहा है तो मतदान के लिए भी ऐसी ही किसी प्रौद्योगिकी का प्रयोग अब तक क्‍यों नहीं निश्चित किया गया? मतदान-केन्‍द्रों पर एक वोटिंग मशीन के बजाय मतदाताओं की संख्‍यानुसार मशीनें लगाई जाएंगी तो एक मतदान का समय कुछ सेकंड न सही पर घण्‍टों की बर्बादी से बचने के लिए कुछ मिनट तो हो ही सकता है। अगर मतदान के दिन बैंक क्रेडिट या डेबिट कार्ड की तरह ही मतदाता पहचान-पत्र को भी केन्‍द्रीयकृत स्‍वैपिंग सिस्‍टम से जोड़ दिया जाए तो सौ प्रतिशत मतदान की गारण्‍टी दी जा सकती है। इसके लिए एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया जा सकता है, जिसे मतदान के दिन पूरे भारत में सभी बैंक एटीएम से जोड़ दिया जाए। ताकि मतदाता अपनी सुविधानुसार सॉफ्टवेयर के आसान इस्‍तेमाल के जरिए देश में कहीं से भी अपने निर्वाचन क्षेत्र के राजनीतिक दल का चुनाव कर सके। इस क्रम में साफ्टवेयर मतदाता से केवल मतदाता संख्‍या और निर्वाचन-क्षेत्र की जानकारी पूछे। या मतदाता-पहचान पत्रों को भी आधार कार्ड की तरह व्‍यक्ति की आंख की पुतली और उंगलियों के छाप के रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया जाए। मतदान के दिन मतदाता पहचान-पत्र को एटीएम पर स्‍वैप करते ही साफ्टवेयर मतदाता को निर्धारित कोण पर खड़े होने का संकेत प्रसारित करे। मतदाता के ऐसा करने पर उसके क्षेत्र की मतदान निर्वाचन नामावली खुल जाएगी। और वह अपनी पसंद के बटन पर क्लिक करके मतदान कर सकता है। यह मतदान की सुरक्षित व्‍यवस्‍था होगी। इसमें मतदान-स्‍थल की सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षाकर्मियों की तैनाती कम होगी। मतदान प्रक्रिया से लेकर मतगणना तक के लिए सरकारी कर्मचारियों को व्‍यक्तिगत प्रयास ना के बराबर ही करने होंगे। कम्‍प्‍यूटर सॉफ्टवेयर के कारण यह सारी कार्यवाही त्‍वरित, पारदर्शी और त्रुटिरहित होगी। मतदान के दिन एटीएम से जुड़े बैंकिंग लेन-देन बन्‍द हों तो यह व्‍यवस्‍था अत्‍यन्‍त उपयोगी हो सकेगी।
 बूढ़े व्‍यक्ति या बीमार लोग जो मतदान-स्‍थल पर जा कर मतदान नहीं कर सकते उनके लिए निर्वाचन आयोग द्वारा एक केन्‍द्रीयकृत निर्वाचन दूरभाष नम्‍बर तैयार किया जाए। यह मतदान के कम्‍प्‍यूटर सॉफ्टवेयर से जुड़ा हुआ हो। इस नम्‍बर पर फोन करते ही रिकॉर्डेड आवाज पूछे कि इस पार्टी के लिए एक दबाएं उस पार्टी के लिए दो दबाएं। इस तरह के नए-नए मतदान प्रयोग करके सौ प्रतिशत मतदान को साकार किया जा सकता है। लेकिन एटीएम, फोन कॉल से जुड़ी यह मतदान सुविधाएं पूर्णत: पारदर्शी होनी चाहिए। इनकी हैकिंग की कोई संभावना न हो। निर्वाचन आयोग को इनके परीक्षण प्रदर्शन के दौरान इनकी श्रेष्‍ठता पर कोई संदेह न हो। यह व्‍यवस्‍था बनती है तो स्‍वयं को सिद्ध करने में लोकतन्‍त्र को बड़ी राहत मिलेगी। कार्यपालिका को इस ओर अवश्‍य सोचना चाहिए। इससे निश्चित रूप से एक-एक आदमी लोकतान्त्रिक चुनाव में भागीदार बन सकेगा।

12 comments:

  1. आपका ब्लॉग पढ़ा। आपके सुझाव अच्छे और तर्क पूर्ण है। किन्तु परिवर्तन आते आते आयेगा। अपने देश में इस तरह का परिवर्तन एकदम से नहीं आसकता। क्यूंकि हमारे देश में आज भी, आधी से ज्यादा जनसंख्या अशिक्षित है और बहुत से तो शिक्षित परिवार भी ऐसे हैं जो आज भी इंटरनेट पर काम करने से कौंसोन दूर हैं। मैं औरों की क्या बात करूँ, स्वयं मेरे पापा जो एक डॉ हैं वह तक इंटरनेट चलना नहीं जानते और ना ही उनमें उसे सीखने की कोई रुचि है। ऐसे न जाने और कितने लोग होंगे। इसलिए ऐसे में आपके सुझाव पर अमल करने के लिए सरकार और प्रशासान को भी उतना ही सोचना होगा जितना एक समझदार व्यक्ति आपके आलेख को पढ़कर सोचेगा।

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  2. लोकतन्त्र के महायज्ञ में यही पूर्णाहुति होगी, शत प्रतिशत मतदान, स्वेच्छा रहे और व्यवस्थाओं से अपेक्षा रहे।

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  3. बहुत सुन्दर सुझाव पर भारत में व्यवस्था के हालात देखते हुए अभी निकट भविष्य में इस के लागू होने की कोई संभावना नहीं दिखाई देती. लोकतंत्र की त्रासदी है कि जो व्यक्ति देश की समस्याओं को समझते हैं और अच्छे बुरे के बीच अंतर कर सकते हैं वे मतदान से दूर रहते हैं और परिणामतः संसद व विधान सभाओं में योग्य व्यक्ति नहीं पहुँच पाते. मतदाताओं को मत डालने के लिए जाग्रत करना ही वर्तमान में एक उपाय नज़र आता है.

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  4. सुझाव अच्छे हैं पर व्यावहारिक तौर पर संभव नही हैं ।

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  5. लोकतंत्र में सभी कि भागीदारी सुनिश्चित करने कि कोशिश तो जारी है ,बेसक गति अपेक्षित नहीं है.... तर्कसंगत सुझाव......

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  6. आपके सुझाव बहुत अच्छे हैं... इस लागू किया जाय तो निसंदेह ही हंड्रेड परसेंट मतदान होगा..

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  7. आपका सुझाव तो उत्तम है.. आने वाले दिनों में एक परिपक्व लोकतंत्र के लिए ये बेहद जरुरी है... रही बात सीखने-समझने की तो थोडा वक़्त लगेगा.. पर यह एक सतत प्रक्रिया है..

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  8. आपके सुझाव और तर्क महत्वपूर्ण हैं ... तकनीकी का प्रयोग कैसे हो इसके लिए और दुसरे देशों की भी स्टडी कराई जा सकती है ...

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  9. आपके सुझाव अच्छे हैं और अगर सरकार की इच्छा हो तो प्रयोग में लाये भी जा सकते हैं..

    आप येही देखिये कि सरकार द्वारा अभी तक विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिक अपने मत का प्रयोग विदेश में रहते हुए ही कर सकें इस का अभी तक कोई हल नहीं निकाला गया है और अगर कोई ज़रिया होगा तो मुझे तो जानकारी नहीं है.
    विदेश में रहने के कारण हमारे वोटर कार्ड भी नहीं बने .

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  10. काश कभी ऐसा हो पाता! विकसित देशों में भी सारी जागरूकता के बावजूद ऐसा नहीं हो पाता. उसपर से अपने यहाँ तो छुट्टी होती है तो पूरा माहौल ही बन जाता है घर में आराम करने का.

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  11. सुझाव तकनीकी के सर्वोच्च सोपान को प्रयोग मे लाना होगा इसके लिए अभी और 5 साल का इंतज़ार करना होगा बसरते चुनाव आयोग इसे लागू करने की सोचे

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  12. विचारणीय किन्तु सब योगदान दे तब ही साकार होगा लोकतंत्र .

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