Sunday, February 23, 2014

आज अच्‍छा लग रहा है


ज अच्‍छा लग रहा है। कार्यालय के साथियों के साथ बैठ कर कुछ व्‍यक्तिगत बातें कीं। उनकी निजी जिन्‍दगी में झांकने की कोशिश की तो पता चला गुजर चुके अन्‍य दिनों की अपेक्षा आज मैं उनसे बहुत ज्‍यादा जुड़ाव महसूस कर रहा हूं। इस वार्ता से यह निष्‍कर्ष निकला कि एक आदमी को अपने समाज, वातावरण या कार्यालय के साथियों से प्रेम के दो शब्‍द सुनने को मिल जाएं तो वह बाग-बाग हो उठता है। और ज्‍यादातर लोग इसी सुगम काम को करने से बच रहे हैं।
     आज पता नहीं क्‍यूं मेरा दिमाग बड़े ही सकारात्‍मक ढंग से हर चीज के बारे में सोच रहा है। आज अपनी सोच, अपने व्‍यक्तित्‍व, साथियों की सोच, उनके व्‍यक्तित्‍व से एक अद्वितीय लगाव महसूस हो रहा है। तन-मन में लगाव की तरंगे रबड़ की तरह खिंचती हुई अनुभव हो रही हैं। आशा करता हूं कि यह अनोखा अनुभव सदैव रहे तो जीवन कितनी ऊंचाई प्राप्‍त कर ले! एकदम लगा कि आगे की आशा-निराशा में मत झूल। इस समय जो आनन्‍द, सामूहिक और सामाजिक लगन अन्‍दर-बाहर गूंज रही है, उसमें स्थिर हो बैठा रह बस। ये गुंजन हमेशा नहीं होता। यह ईश्‍वर की कृपा लगती है। आज वह मुझ पर प्रसन्‍न लगता है।
तेईस फरवरी सन् 2014 का समय मेरे मन में विराट रूप धारण किए हुए है। कार्यालय आते समय राह चलते जितने भी लोगों के चेहरे देखे, सब की भंगिमाएं याद आ रही हैं। केवल याद ही नहीं आ रही हैं, उनके बारे में गहराई तक ज्ञान भी हो रहा है कि उनके पीछे की कहानी क्‍या है। सुखी भंगिमावाले व्‍यक्तियों को छोड़ कर दुखित व्‍यक्तियों के लिए शुभकामना, सम्‍मान, प्‍यार उमड़ रहा है।
फरवरी फरफरा रही है। चल वसंत चलायमान है। मौसम का ही असर था कि पन्‍द्रहवीं लोकसभा के आखिरी सत्र में सालों से एक-दूसरे की आंखों में धूल-मिर्ची झोंक रहे सांसद भावुक हो उठे। लालकृष्‍ण आडवाणी तो रो भी पड़े। पता नहीं कौन सी हूक उनके दिल में उठी होगी कि वे आंसुओं को पोंछते हुए दिख पड़े।
 नरेन्‍द्र मोदी की सभाओं में उमड़ती भीड़ का उत्‍साह भी मौसम के प्रभाव में चौगुना हो गया है। मंच से मोदी गरज रहे हैं। उनके भाषणों में गजब आकर्षण है। वे जो कुछ बोल रहे हैं, उसे पढ़ कर नहीं बोल रहे हैं। इससे सिद्ध होता है कि जिस आदमी के पास विवाहित होकर भी ब्रह्मचर्य सी शक्ति है उसके पास आत्‍मविश्‍वास की बहुतायत होती है। और ब्रह्मचर्य से पोषित आत्‍मविश्‍वास किसी को किसी राष्‍ट्र का प्रधानमन्‍त्री क्‍या जनसम्राट तक बना सकता है। युवाओं को ऐसे नेता को प्रधानमन्‍त्री बनते देखने का अवसर प्राप्‍त हो या न हो, पर वे उसकी ओजस्‍वी वाणी का कारण ढूंढने बैठें तो उन्‍हें जीवन में ब्रह्मचर्य की महत्‍ता का अहसास जरूर होगा। क्‍या ये किसी नेता का अपने देश के युवाओं पर कम उपकार होगा!
देश की चारों दिशाएं एक नए जोश से भरी हुईं हैं। मैं क्‍या उस जोश का समाचार पढ़ने या देने के लिए ही बना हूं? मुझे भी उसमें शामिल हो कर उमंगित, उल्‍लसित नहीं होना चाहिए? आडवाणी जी इसलिए नहीं रोए कि उन्‍हें संसद का पिता कहा गया। वे रोए क्‍योंकि उन्‍हें चारों दिशाओं से उठनेवाले जोशीले तूफान का प्रत्‍यक्ष हिस्‍सा नहीं बन पाने का दुख है। उन्‍हें ये सुखानुभूति भी है कि जो कमल खिलनेवाला है, उसका खाद-पानी कीचड़ नहीं बल्कि राष्‍ट्र की करोड़ों निर्मल आकांक्षाएं होंगी।
आज सचमुच बहुत अच्‍छा लग रहा है। नव उत्‍साह, उमंग के साथ आगे ही आगे बढ़ने की शक्ति शरीर में संचारित हो रही है। और जिसे ऐसे वातावरण में घुटन हो रही हो उसकी सद्बुदि्ध के लिए मंगलकामनाएं हैं।

18 comments:

  1. WAAH............
    BAHUT ACHHA LAGA

    KYA BAAT HAI

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  2. अरे वाह! ईश्वर करे आपके जीवन में यह उत्साह और यह सकारात्मक्ता का भाव सदा बना रहे। शुभकामनायें...

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  3. उत्साह कि तरंग तो हर वक्त आलोड़ित होती है। बार्ह्य वातावरण का सामंजस्य इन आंतरिक तरंगो से जब होता है तो आनंद अनुभूतुतित होता है..... ...अनुभवजनित भाव सदा बनी रहे शुभकामनाएँ

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  4. मंगलकामना बने रहे....

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  5. सकारात्मक सोच|

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  6. बढ़िया प्रस्तुति- -
    आभार आदरणीय -

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  7. एक सकारात्मक सोच,मंगलकामनाये।

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  8. सुख दुःख बांटने से सकारात्मकता आती है ... आज कल तो वैसे भी नमो का बोलबाला हो रहा है ... जो नेगेटिव प्रचार ज्यादा नहीं कर रहे ...

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  9. खुशनुमा अहसास खुद ही हाले-बयाँ कर रहा है.. यही निरंतरता बनी रहे..

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  11. उत्साह किसी भी स्रोत से आए अच्छा ही होता है ।स्वागत करने योग्य ।

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  12. ये उत्साह ऐसे ही बना रहे और इस उत्साह के लिये नित वजह मिलती रहें...आमीन।।।

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  13. बहुत बढ़िया सकारात्मक अनुभूति से लबालब आलेख
    धन्यवाद.....

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  14. देश को भी सुखद भविष्य का अधिकार है।

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  15. इस बार तो मोदी जी कि ही लहर है ।

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  16. यह सकारात्मकता और उत्साह ही जीवन को आगे बढाता है...शुभकामनायें!

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  17. परिवर्तन के इस बयार में जो भी होगा, वर्तमान के के इस घने तिमिर से अच्छा ही होगा.

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  18. बिलकुल सही कहा 'कमल कीचड़ में नहीं बल्कि राष्‍ट्र की करोड़ों निर्मल आकांक्षाओं में खिल रहा है.
    नमो की छत्रछाया में देश को प्रगति के नए आयाम मिलें ,हर भारतवासी को शुभकामनाएँ .

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