महत्‍त्‍वपूर्ण आलेख

Saturday, September 14, 2013

धूम्रपान निषेध


दादीजी की तेरहवीं करके 25 जुलाई को पैतृक घर से कोटद्वार आ रहा था। सतपुली, पौड़ी गढ़वाल, उत्‍तराखण्‍ड से जीएमओयूलि की बस में सवार हुआ। पत्‍नी, साढ़े चार वर्षीय बालिका, सासू जी भी साथ ही थीं। बस में चढ़ कर देखा कि सीट उपलब्‍ध है या नहीं। खिड़कियोंवाली सभी सीटों पर लोग बैठे हुए थे। ये सोच कर की पत्‍नी, बालिका और सासू जी सभी उल्टियां करते हैं और इन्‍हें खिड़कीवाली सीटें चाहिए मैं बस से नीचे उतर आया। इतने में परिचालक आया। असभ्‍यता और अधिकार के साथ कहने लगा, चढ़ो बस में मैं सीट दिलाता हूँ। हर किसी को खिड़की चाहिए। सभी नेता बने हुए हैं। एक बार तो मन हुआ कि इसे जोर का चांटा मारूं। पर बस तक छोड़ने आए सम्‍बन्‍धी, पत्‍नी और सासू जी के रहते चुप ही रहा और बस में बैठ गए। बारिश हो रही थी। पत्‍नी, सासू जी और बालिका परिचालक की सीट पर बैठ गए। इसलिए उन्‍हें तो बाहर की ताजी हवा मिलती रही। पर मैं पीछे बैठा हुआ था। बारिश की बौछारें अन्‍दर न आ पाएं इसलिए अधिकांश यात्रियों ने खिड़कियां बन्‍द की हुईं थीं। मुझे बाहर की स्‍वच्‍छ हवा नहीं मिल पा रही थी। घुटन महसूस होने लगी। यहां तक तो ठीक था क्‍योंकि मैं ध्‍यान, संकेन्‍द्रण के द्वारा घुटन, सांस लेने में हो रही कठिनाई को दूर करता रहा। लेकिन अचानक बीड़ी की दुर्गन्‍ध आने लगी। सोचा नाक बन्‍द कर इससे छुटकारा पा लूं। पर यह कोई अचानक आया हवा का झोंका नहीं था जो क्षण में आया और गया और अपनी गंध भी अपने साथ ले गया। नाक से रुमाल हटाया तो बीड़ी की दुर्गन्‍ध पहले से अधिक मात्रा में फैल चुकी थी। बाहर बारिश, खिड़कियां बन्‍द और बस के अन्‍दर बीड़ी की दुर्गन्‍ध का गुबार। बढ़िया तरीके से बने, चौड़े राष्‍ट्रीय राजमार्ग 119 पर गाड़ी की गति भी बहुत तेज थी।  यह सब अनुभव करके मेरा सिर दर्द शुरु हो गया। उल्टियां होने का अहसास होने लगा। जब सहनशक्ति कम होने लगी तो परिचालक से बोला, कोई बस में बीड़ी पी रहा है, उसे मना कर दीजिए वह बीड़ी न पिए। बहुत समस्‍या हो रही है। खुद मना कर लो। मैं क्‍यूं मना करुं। मुझे क्‍या पता कौन पी रहा है। पी रहा है तो पीने दो उसे। मैं क्‍या करुं। परिचालक ने अकड़ और ऐंठ से जवाब दिया। मैंने उसे कहा, आप इस बस के परिचालक हैं और बस में घटनेवाली अवैध गतिविधियों को रोकने का सम्‍पूर्ण दायित्‍व आपका है। अपना दायित्‍व ठीक से निर्वाह करने के बजाय आप मुझसे ही बदतमीजी कर रहे हैं। जब मैंने उससे उसका नाम पूछा तो नाम बता कर और मुंह के अन्‍दर पता नहीं क्‍या-क्‍या बड़बड़ाते हुए चालक के पास चला गया और मेरी ओर इशारा करते हुए बात करने लगा। मुझे अचम्भा इस बात पर हुआ कि कोई भी सहयात्री मेरे सहयोग में कुछ नहीं बोला। पूरी बस में मेरी, मेरी पत्‍नी और परिचालक की आवाज के अतिरिक्‍त और कोई आवाज नहीं हुई। हां बीड़ी की दुर्गन्‍ध अब पहले से ज्‍यादा हो गई थी। एक शब्‍द भी और बोलता तो शायद उल्टियां करने लगता। इसलिए चुप लगा गया और नाक को रुमाल से कसकर बान्‍ध दिया। यह सोचकर आगे-पीछे नजर घुमाई कि शायद बीड़ी पीनेवाला दिख जाए। पर वह तो पता नहीं कौन सी आड़ ले कर धूम्रपान कर रहा था कि दिखाई ही नहीं दिया। जो भी हो पर वह अपने दुस्‍साहस में पूरी तरह से कामयाब था। परिचालक ने शायद उसे देखा। पर उससे कुछ न बोला।
      कोटद्वार पहुंच कर पत्‍नी, सासू जी और बिटिया को ये कह कर घर भेज दिया कि तुम चलो मैं एक काम निपटा कर आता हूँ। बस का नम्‍बर नोट किया और आरटीओ कार्यालय की ओर चल पड़ा। रास्‍ते में सहायक सम्‍भागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) की गाड़ी आती हुई दिखी। भागते हुए गाड़ी को रुकवाया। महिला परिवहन अधिकारी ने मेरी शिकायत पूरी मनोयोग से सुनी और दोषी परिचालक के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने का आश्‍वासन दिया। दोषी परिचालक से सम्‍बन्धित आवश्‍यक जानकारी मुझसे प्राप्‍त कर परिवहन अधिकारी ने अपना पता और दूरभाष संख्‍या मुझे भी उपलब्‍ध कराई।
इस घटना के दस-पन्‍द्रह दिन के बाद ही कार्यालय सहायक सम्‍भागीय परिवहन अधिकारी, कोटद्वार गढ़वाल ने प्रधान प्रबन्‍धक, जीएमओयू लिमिटेड कोटद्वार और अध्‍यक्ष, जीप टैक्‍सी/मैक्‍सी यूनियन कोटद्वार को अपनी व्‍यवस्‍थान्‍तर्गत संचालित वाहनों पर धूम्रपान ना करने एवं जहरखुरानी गिरोह से सावधान जैसी सूचना चस्‍पां किए जाने हेतु निर्देशित किया। मुझे यह जानकार प्रसन्‍नता हुई कि इस सार्वजनिक कल्‍याण कार्य के लिए उपरोक्‍त बस एवं टैक्‍सी यूनियन अध्‍यक्षों को प्रेषित पत्र की प्रतिलिपियां जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल, सम्‍भागीय परिवहन अधिकारी गढ़वाल और मुझे भी भेजी गईं।
      यदि सहायक सम्‍भागीय परिवहन अधिकारी के निर्देशानुसार चिन्हित कार्य की दिशा में जीएमओयू लिमिटेड कोटद्वार और जीप टैक्‍सी/मैक्‍सी यूनियन कोटद्वार द्वारा उचित र्कारवाई की जाती है तो गढ़वाल की परिवहन व्‍यवस्‍था हेतु यह एक सराहनीय कदम होगा। जिलाधिकारी और सम्‍भागीय परिवहन अधिकारी गढ़वाल से भी अपेक्षित है कि वे इस परिप्रेक्ष्‍य में अपने स्‍तर पर उपयोगी कदम उठाने का कष्‍ट करें। कल ही पौड़ी गढ़वाल की यात्रा कर लौटे पड़ोसियों से पता चला कि आजकल सभी जीएमओयूलि बसों के प्रवेश द्वार पर बड़े-बड़े अक्षरों में धूम्रपान निषेध लिखा हुआ है। यह सुनकर दिल को बड़ी शांति मिली।

15 comments:

  1. बहुत ही प्रभावशाली और सराहनीय कदम !!

    ReplyDelete
  2. आपकी पहल ने अपना असर
    दिखाया .....सुन्दर काम

    ReplyDelete
  3. चलिये कुछ तो अच्छा हुआ... इसी तरह बाकी के आम लोग करें तो ऐसी बहुत सी समस्याओं से निजात पायी जा सकती है... सराहनीय कदम शुभकामनायें आपको...

    ReplyDelete
  4. अगर ऐसे ही हर नागरिक जागरूक हो तो देश की काया पल्टने में देर नहीं लगेगी लेकिन ऐसा बहुत कम होता है कि जो सही आवाज़ उठाता है उसका साथ देने भी कोई नहीं आता.
    आप के साथ बस में यह घटना हुई और आपने सही कदम उठाया .उनकी शिकायत की.
    एक बार मेरे साथ ऐसा विमान यात्रा में हुआ था .. उन दिनों अब की तरह पूरे विमान में धुम्रपान निषेध नहीं था ,एयर इंडिया का विमान था.मैं अकेली यात्रा कर रही थी मेरे आस पास सभी पुरुष यात्री थे.मैं उस समय ५ महिना प्रेग्नेंट थी ,मेरे पास बैठे एक यात्री ने जब सिगरेट का धूआं उडाना शुरू किया तब मुझे बहुत तकलीफ हुई ...मैं ने उस व्यक्ति से निवेदन किया की कृपया सिगरेट न पियें परन्तु उस ने मज़ाक बना कर और अधिक धूआं उडाना शूरू कर दिया ,मैं वहां से उठकर एयर होस्टेस के पास गयी कि उस व्यक्ति को मना कर दें ..उस ने एक बार कहा लेकिन उस यात्री ने पीना बंद नहीं किया ,फिर मैं ने स्टुअर्ड से कहा कि मेरी सीट बदल दिजीये ..लेकिन उस ने एक बार फिर उस यात्री को टोका परन्तु सीट बदल न सकने की बात कही..क्यूंकि पूरा विमान भरा हुआ था .न किसी विमान कर्मचारी ने किसी से मेरी सीट बदलने का प्रयास किया....मैं इतनी असहज हो गयी थी कि वहां बैठ पाना मुश्किल था ..उन दिनों गुस्सा करना भी नहीं आता था.मन मार कर आगे जा कर खडी रही .इस घटना को बताने का कारण यह है कि सहयात्री बस के हों या विमान के ...कोई फर्क नहीं है..ज़रूरत के समय न तो हर कोई मदद या सहयोग को आगे आने का साहस करता है ..वो दिन था आखिरी समय जब मैंने एयर इंडिया से सफ़र किया था ,उसके बाद हमेशा खाड़ी देश के विमान को सफ़र के लिए चुना ,क्योंकि उनमें उन दिनों भी धुम्रपान निषेध का नियम पूरे विमान में था और वैसे भी वे आप को कम से कम एक यात्री के सभी अधिकार देते हैं और इस तरह की कोई शिकायत होने पर तुरंत एक्शन लेते हैं. मेरे अनुभव में अधिकतर भारतीय लापरवाह स्वभाव के हैं जो जब तक खुद के साथ कोई बात न हो जाए तब तक किसी बात की परवाह नहीं करते .और बहुत से सरकारी कर्मचारी अपनी नौकरी पक्की हिया यह जानते हैं इसलिए उन्हें भी ग्राहक के अधिकारों का ,उनकी सेवा से उन्हें कोई लेना देना नहीं है.

    ReplyDelete
  5. सराहनीय कदम,शुभकामनायें.

    ReplyDelete
  6. बधाई! आपने शिकायत की, उस पर सही कार्यवाही भी हुई. यह घटना यहाँ शेयर करने से अन्य लोगों को भी कुछ प्रेरणा तो मिलेगी ही. परिवहन विभाग को अन्य बातों के साथ अपने चालकों-संचालकों को दायित्वों और व्यवहार का प्रशिक्षण भी देना चाहिए.

    ReplyDelete
  7. अल्‍पना जी आपको हुई तकलीफ समझी जा सकती है। ऐसी अवस्‍था में सच में आपको बहुत समस्‍या हुई होगी। धन्‍यवाद अपना अनुभव बांटने के लिए।

    ReplyDelete
  8. नियम तो अपने यहाँ भी सारे हैं लेकिन नियम पालन की निगरानी होती है और ना हो हम प्रयास करते हैं.बहुत अच्छा लगा जानकर कि आपने बिलकुल सही तरीके से शिकायत भी की और उसपर कारवाई की पहल भी हो रही है.

    ReplyDelete
  9. यह पढ़कर अच्छा लगा कि शिकायत करने पर कार्यवाही हुयी।

    ReplyDelete
  10. लिखने ओर पालन करने में कई बार बहुत अंतर होता है ... फिर भी ये सुखद पहलू है की आपने अपना कर्तव्य किया ओर कार्यवाही भी हुई ...
    धूम्रपान बहुत बड़ी समस्या है ओर सहयात्रियों का ख्याल कोई नहीं रखता विशेष कर परिवहन में ...

    ReplyDelete
  11. धूम्रपान निषेध का बोर्ड वैसा ही है जैसा सिगरेट की डिब्बी पर लिखी वैधानिक चेतावनी । मुझे अपने गाँव का बस का सफर याद आगया ।

    ReplyDelete
  12. ....तो क्षीण नहीं है आशा की कोई भी किरण..बस आगे बढ़कर चमक देखने की जरुरत है..

    ReplyDelete
  13. सराहनीय कदम विकेश जी, शुभकामनायें।

    ReplyDelete
  14. सराहनीय कदम...अगर सभी इसी तरह गलत कार्य के प्रति आवाज़ उठायें तो कुछ बदलाव की संभावना पैदा हो सकती है...

    ReplyDelete
  15. badola ji yeh desh ki vayvastha hai aour aapki baton ka samarthan n karana logon ki aadat. ye hi baten hi hamen badlni han

    ReplyDelete

Your comments are valuable. So after reading the blog materials please put your views as comments.
Thanks and Regards